Monday, November 24, 2008

२० नवम्बर

२० नवम्बर की तारीख हमेशा ही खास रहती है मेरे लिए, जब मैं अपना जन्मदिन मनाता हूँ. खास इसलिए कि कुनकुनी सर्दियों के गुलाबी माहौल में मां के हाथ से बने कुछ ख़ास पकवान, अपनों का साथ और आशीर्वाद मुझे आगे बढ़ने कि प्रेरणा देते थे. वैसे इस बार भी ये दिन खास ही था.. क्योंकि पहली बार इनमे से कुछ भी मेरे पास नहीं था..

तमाम पारिवारिक परिस्थितियों और एक लंबे समय से घर से दूर रहते हुए लगा भी नहीं कि जिंदगी का सफर इतना लंबा भी हो सकता है कि साथ चलने वाले ही पीछे छूटते लगने लगें. कोई पीछे मुड़ कर देखे तो अपने कदम किसी विजय शलाका पर न होकर किसी वीरान पर्वत पर दिखें..

एक उठापटक सी चल रही है मन में पिछले कुछ वक्त से, वरीयताएँ बदल सी रही हैं. पर ये सोच कर अच्छा लग रहा है कि लेखन से एक लंबे वक्त तक दूर रहने के बाद भी लोगों का स्नेह कायम है. सप्ताह भर पहले की मेरी पिछली पोस्ट के बाद लोगों के व्यक्तिगत ई मेल्स से इतना तो जाहिर ही हुआ.

बस इतना कहना चाहूँगा कि अब जो लोग मेरे जीवन में हैं, प्रयास रहेगा कि उनको कभी न खोना पड़े.

शेष फ़िर...

Saturday, December 29, 2007

बस आपके लिये…

ज्यादा दिन नहीं हुए जब मैंने "आपके लिये जिन्दगी का एक दिन और सही" पर लिखना शुरु किया। लोगों ने पढ़ा, उत्साह वर्धन भी किया और और अगर कभी अच्छा लिख सका तो सभी ने सराहा भी।

पर वह चिट्ठा मूलत: हास्य-व्यंग्य और व्यक्तिगत सन्स्मरण की शैली पर ही आधारित होने के कारण बहुत सी ऐसी बातें होती थीं जो मन में तो आती थीं, पर उसे वहाँ पर लिखा जा सकना उचित नहीं था। कुछ भी ऐसा जो मुझे अच्छा लगा या कभी बुरा भी लगा, कुछ पुराने बीते हुए खट्टे मीठे अनुभव जिन्होंने मुझे हँसाया बहुत तो रुलाया भी कम नहीं। कम शब्दों में कहूँ तो "हम बेवफ़ा…" को एक तरह से मेरी डायरी के कुछ पन्ने समझ लीजिये।

फ़र्क सिर्फ़ इतना ही है कि उन भावनाओं और एहसासों को मैंने कभी पन्नों पर नहीं उकेरा। दिल में ही किसी कोने में दबाकर रखा था अब तक जिसे ना जाने क्या सोच कर अब दिल से बाहर लाने का मन कर रहा है। एक ऐसी दुनिया के बारे में जिसमें अब तक मैं और केवल मैं था, और कोई नहीं। और जो कोई आये भी, वो कुछ इस तरह से चले गये कि अब उनके बारे में याद करने को भी दिल नहीं करता।

बस अब तो जो भी है… समझिये, बस यूँही है।

Friday, December 28, 2007

टेस्ट पोस्ट

ठीक है ना।
सो ज्यादा ध्यान से पढ़ने की जरूरत नहीं है